आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं जटाधारा फिल्म के बारे में। अब हम आपसे जटाधारा फिल्म के बारे में बात करें तो सोनाक्षी सिन्हा ने फिल्म “जटाधारा” से साउथ सिनेमा का रुख किया, जिसमें वह सुधीर बाबू संग नज़र आई।
इस फिल्म ने उन्होंने पहली बार ‘पिशाचिनी’ का किरदार निभाया था। ‘जटाधारा’ को हॉरर बनाने के चक्कर में मेकर्स पूरी तरह से दिशाहीन हो गए।
इन दिनों दक्षिण भारतीय सिनेमा में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के जुड़ी कहानियाँ खूब दिखाई जा रही हैं। यह आवश्यक नहीं हैं की ऐसी सारी फिल्में अच्छी ही हो। ये फिल्म जटाधारा उसी का एक उदाहरण हैं।
क्या हैं ‘जटाधारा’ की कहानी?- Kya hain Jatadhara ki kahani?
इस फिल्म की कहानी शुरु शोभा को दिखे एक सपने से होती हैं, जिससे उन्हें पता चलता हैं की उनके घर में बड़ा खजाना हैं, लेकिन उसको पाने के लिए धन पिशाचिनी को खुश करना पड़ेगा। उन सब के बाद कहानी घोस्ट हंटर शिवा पर आ जाती हैं, जिसे स्वयं भूतों में विश्वास नहीं होता हैं।

बचपन में अपने दोस्त के साथ हुई एक घटना के कारण वह भूतों और आत्माओं की तलाश में शहर के सबसे डरावनए स्थानों पर आ जाता हैं। ऐसे ही एक स्थान पर उसकी मुलाकात सितारा से हो जाती हैं, जो अलग-अलग स्थानों की प्राचीन मूर्तियों पर शोध कर रही होती हैं।
इन दोनों के बीच प्यार पनपता हैं। इस बीच शिवा को खजाने वाले स्थान और धन पिशाचिनी के बारे में पता चलता हैं, वह भी उस स्थान पर पहुँच जाता हैं। जहाँ उसको उस स्थान से अपने बचपन के जुड़ाव का पता चलता हैं। अभी शिवा धन पिशाचिनी पर काबू कर पाता हैं या मृत्यु उस पर विजय प्राप्त करती हैं, यह फिल्म इस बारे में होती हैं।
जानिए महारानी सीजन 4 फिल्म की कहानी के बारे में।
कमज़ोर हैं फिल्म का निर्देशन- Kamzor hain Film ka nirdeshan
इस फिल्म की कहानी बिखरी हुई हैं। यह कहानी किस दिशा में जाएगी या उसका उद्देश्य क्या हैं, यह इंटरवल तक भी नहीं पता चलता हैं। इंटरवल के बाद थोड़े रोमांचक सीन दिखते हैं। इस फिल्म के निर्देशन और एडिटिंग दोनों ही बहुत कमज़ोर हैं। इस फिल्म को देखते हुए मन में कई सवाल उठते हैं, जिनका जवाब और तर्क दर्शकों को अपने मन से निकालना पड़ता हैं। इस फिल्म में उनके कोई जवाब नहीं हैं।

अभिनय के मामले में सुधीर बाबू ने अपने हिस्से में आए काम को ईमानदारी से करने का प्रयास किया हैं, लेकिन कई जगहों पर ऐसा लगता हैं की आखिर नायक वह चीज़ कर ही क्यों रहा हैं?
इस फिल्म में कई स्थानों पर सनातन धर्म को वैज्ञानिक तर्कों से जोड़ने का प्रयास किया हैं, लेकिन वह सब केवल भाषण नुमा लगता हैं। बैंकग्राउंड म्यूजिक प्रभावित नहीं करता हैं। इस फिल्म के गाने जबरदस्ती ठूंसे लगते हैं। इस फिल्म के अंत में फिल्म की सीक्वल बनाए जाने का संकेत हैं।
इसी बीच फिल्म में अगर कुछ अच्छा हैं तो वह हैं फिल्म का आर्ट डायरेक्शन, बड़े-बड़े सेट और सुधीर बाबू, शिल्पा शिरोडकर, इंदिरा कृष्णन और रोहित पाठक जैसे कलाकारों का अभिनय। बाकी यह फिल्म मनोरंजन कम और बोर ज्यादा करती हैं।
आवश्यक जानकारी:- जस्सी वेड्स जस्सी फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं जटाधारा फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको जटाधारा फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ जरुर प्राप्त होंगी।
इस जानकारी से आपको जटाधारा फिल्म से संबंधित हर तरह की जानकारियाँ अवश्य प्राप्त होंगी। अगर आपको हमारी दी हुई जानकारियाँ पसंद आए तो आप हमारी दी हुई जानकारियों को लाइक व कमेंट जरुर कर लें।
इससे हमें प्रोत्साहन मिलेगा ताकि हम आपको बहेतर-से-बहेतर जानकारियाँ प्राप्त करवा सकें। हमारा उद्देश्य आपको घुमराह करना नहीं हैं बल्कि आप तक सही जानकारियाँ प्राप्त करवाना हैं।
