120 बहादुरों की कहानी के साथ कितना न्याय कर पाए फरहान अख्तर?

Vineet Bansal

आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं 120 बहादुर फिल्म के बारे में। अब हम आपसे 120 बहादुर फिल्म के बारे में बात करें तो अभिनेता फरहान अख्तर ने 4 साल बाद फिल्म पर्दे पर वापसी की हैं। यह फिल्म 120 बहादुर सिनेमाघरों में 21 नवंबर को रिलीज़ हो रही हैं।

देशभक्ति पर आधारित कहानी हमेशा से फिल्ममेकर्स की पसंद रही हैं। विशेष रुप से युद्ध आधारित फिल्मों में सैनिकों की जिंदगी, संघर्ष और पारिवारिक पहलू को बारीकी से उकेरा जाता हैं। देश के प्रति उनका समर्पण और प्रतिबद्धता पर्दे पर देखते हुए कई बार गला रुंध जाता हैं या आँखें भर आती हैं।

अपने सैनिकों का बलिदान देखकर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता हैं। फरहान अख्तर अभिनीत फिल्म ‘120 बहादुर’ भारत और चीन के 1962 के युद्ध पर आधारित हैं। जिसमें 13वीं कुमाऊँ रेजिमेंट ने रेजांग ला पर बर्फीले मौसम में तेज़ हज़ार से ज्यादा चीनी सैनिकों का सामना किया था।

क्या हैं 120 बहादुर फिल्म की कहानी?- Kya hain 120 Bahadur Film ki kahani?

इस फिल्म की कहानी की शुरुआत 18 नवंबर 1962 से होती हैं। रेडियो ऑपरेटर रामचंद्र यादव घायल हैं और सदमे में हैं। वह पिछले दो दिनों में घटित घटनाक्रम का वृतांत सुनाते हैं। उनकी तैनाती दिल्ली से चुशुल में की जाती हैं। युद्ध के हालातों के बीच चुशुल को भारत अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाहता हैं।

Kya hain 120 Bahadur Film ki kahani

अहीर समाज से आने वाली 13वीं कुमाऊँ रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के कमांडर शैतान सिंह रेजांग ला को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी संभालते हैं। शुरुआत सैनिकों की जिंदगी और आपसी नोकझोंक दिखाने से होती हैं।

चीनी सैनिकों की दहशत गाँव में दिखने लगती हैं। वह पूरे गाँव को निशाना बनाते हैं। वहीं शैतान सिंह चीनी सेना के मंसूबों को भांप जाते हैं की खराब मौसम का लाभ उठाकर दुश्मन भारत पर वार करेगा। वह अपनी दूरगामी सोच और अनुभव से चीनी सेना से निपटने की रणनीति बनाते हैं। सीमित संसाधन, प्रतिकूल परिस्थितियों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद सैनिक कंधे से कंधे मिलाकर उनके साथ लड़ाई लड़ते हैं।

जानिए आगरा फिल्म की कहानी के बारे में।

सैनिकों की जिंदगी को दिखाया गया- Sainik ki zindagi ko dikhaya gaya

साल 1964 में आई धर्मेंद्र और बलराज साहनी अभिनीत ब्लैक एंड व्हाहट फिल्म हकीकत 1962 में भारत और चीन के बीच लड़े गए युद्ध पर आधारित थी। उसमें सैनिकों की जिंदगी के हर पहलू को बारीकी से दिखाया गया था। उसका गाना अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

Sainik ki zindagi ko dikhaya gaya

‘धाकड़’ निर्देशित कर चुके रजनीश धई की फिल्म में वीएफएक्स काफी हैं, लेकिन कहानी के चित्रण में कमज़ोर साबित होते हैं। राजीव मेनन की लिखी कहानी और स्क्रीनप्ले में हाड़ कंपा देने वाली ठंड का जिक्र होता हैं, लेकिन एहसास नहीं। भावनाओं का एहसास जग पाने में वह विफल रहे हैं।

शुरुआत में सैनिकों के बीच आपसी नोकझोंक के दृश्य हो या अपने परिवार की कमी अखरना उससे जुड़ाव महसूस नहीं होता हैं। ऐसे दृश्य युद्ध आधारित फिल्मों में पहले देखे गए हैं। युद्ध से पहले गाँववालों को निशाना बनाने के दृश्य झकझोंरते नहीं हैं।

सुमित अरोड़ा के लिखे संवाद भी प्रभाव नहीं छोड़ते हैं। आखिर में भारी भरकम चीनी सेना के सामने मुट्ठी भर भारतीय सैनिकों के कुछ दृश्य रोमांच लाते हैं। क्लाइमैक्स सीन में शैतान सिंह भाटी के बलिदान को ज्यादा बेहतर तरीके से दिखाने की गुंजाइश थी।

आवश्यक जानकारी:- दिल्ली क्राइम 3 वेब सीरिज़ की कहानी के बारे में।

निष्कर्ष- Conclusion

ये हैं 120 बहादुर फिल्म की कहानी से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको 120 बहादुर फिल्म की कहानी से संबंधित हर तरह की जानकारियाँ जरुर प्राप्त होंगी।

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