आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी फिल्म के बारे में। अब हम आपसे तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी फिल्म के बारे में बात करें तो कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ सिनेमाघरों में क्रिसमस के अवसर पर रिलीज़ हुई हैं। इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म से अगर आप काफी उम्मीद लगाकर बैठे हैं तो आपको निराशा झेलनी पड़ सकती हैं, क्योंकि इसमें न तो केमिस्ट्री हैं और न ही कहानी।
2025 के कल्चर में मैं नाइनटीज की हुकअप स्टोरी चाहती हूँ। उस दौर की प्रेम कहानियों के सात पड़ाव होते हैं- अनजाने से मुलाकात, फिर तकरार, धीरे-धीरे प्यार, बिछड़ने का डर, परिवार का विरोध, माता-पिता को मनाने की जद्दोजहद और अंत में मिलना या बिछड़ना। यह संवाद फिल्म की नायिका रुमी बोलती हैं और यहीं से दर्शकों को यह इशारा मिलता हैं की यह कहानी इन्हीं पड़ावों से गुजरेगी, लेकिन यह प्रेम कहानी किसी पड़ाव पर प्रभावित नहीं कर पाती हैं।
कितनी रोमांटिक हैं फिल्म की कहानी?- Kitani Romantic hain film ki kahani?
इस फिल्म की कहानी की शुरुआत दिल्ली में एक आलीशान शादी से होती हैं, जिसकी वेडिंग प्लानर पिकी होती हैं। उनका बेटा रेहान हेलीकॉप्टर से दूल्हे को लाता हैं और यहीं से उसकी एंट्री एक चार्मिंग किरदार के रुप में होती हैं। रेहान क्रोएशिया की यात्रा पर निकलता हैं, जहाँ एयरपोर्ट पर उसकी मुलाकात लेखिका रुमी वर्घन से होती हैं, जो लव इन आगरा नामक किताब की लेखिका हैं।

पहली मुलाकात में इन दोनों के बीच नोकझोंक होती हैं, जो रोमांटिक फिल्मों का जाना-पहचाना फॉर्मूला हैं। क्रोएशिया के आठ दिनों की यात्रा में यह तकरार धीरे-धीरे प्यार में बदल जाती हैं। इन सब के बीच नींद की बीमारी में चलने वाले उसके पिता रिटायर्ड कर्नल अमर वर्घन सिंह का एक्सीडेंट हो जाता हैं।
जानिए सितारों के सितारे फिल्म की कहानी के बारे में।
फिल्म से ज्यादा एड प्रमोशन का करवाती हैं एहसास- Film se jyada add promotion ka karwati hain ehsas
समीर विद्वांस निर्देशित फिल्म का पहला हिस्सा पूरी तरह क्रोएशिया की खूबसूरत लोकेशन्स, कैफे, बीच और टूरिस्ट स्पॉर्ट्स में घूमता रहता हैं। यहाँ तक की एयरलाइंस और कॉमेटिक ब्रांड्स की ब्राडिंग भी खुलकर नज़र आती हैं, जो कहानी से ज्यादा प्रमोशन का एहसास कराती हैं। करण श्रीकांत शर्मा की लिखी कहानी का ज्यादा फोकस रेहान और रुमी हैं बाकी किरदारों को उभरने का अवसर नहीं मिलता हैं। न ही उनके पात्रों को समुचित तरीके से गढ़ा गया हैं।

यह कहानी को और कमज़ोर बनाते हैं। मध्यांतर के बाद कहानी आगरा आती हैं। कर्नल अमर अपने घर से बेइंतहा प्रेम करते हैं। यही कारण हैं की देश नहीं छोड़ना चाहते हैं। रुमी रेहान से साफ कह चुकी होती हैं की यह शादी तब तक नहीं हो सकती जब तक पिता मर न जाए।
शादी के बाद लड़की ही घर क्यों छोड़े। लड़का भी आकर रह सकता हैं। यह संदेश विचार के स्तर पर मज़बूत हैं, लेकिन फिल्म में इस संदेश को जिस तरह से पेश किया गया हैं, वह बेझिल लगता हैं। आधुनिक सोच वाली रुमी का किरदार आगरा जैसे पारंपरिक माहौल में पूरी तरह से स्थापित नहीं हो पाता हैं।
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निष्कर्ष- Conclusion
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