आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं महारानी सीजन 4 के बारे में। अब हम आपसे महारानी सीजन 4 के बारे में बात करें तो हुमा कुरैशी एक बार फिर से रानी भारती बनकर ओटीटी प्लेटफॉर्म सोनी लिव पर ‘महारानी सीजन 4’ के साथ लौट चुकी हैं। इस बार बिहार की मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर उनकी नज़र ‘प्रधानमंत्री’ की कुर्सी पर हैं।
साल 2021 में बिहार के मुख्यमंत्री भीमा की चौथी पास अनपढ़ पत्नी रानी भारती परिस्थितिवश अनिच्छा से राजनीति में कदम रखती हैं। बाद में वह अपने ही पति की इच्छा के विरुद्ध फैसला लेने लगती हैं। दोनों के रिश्तों में दरार आ जाती हैं। घटनाक्रम मोड़ लेते हैं भीमा की हत्या हो जाती हैं। रानी उसकी हत्या का बदला लेती हैं।
यह सारा घटनाक्रम पिछले तीन सीजन में घटित हुआ हैं। शक्ति, विश्वासघात और अस्तित्व को लेकर गढ़ा गया राजनीतिक ड्रामा चौथे सीजन में कहानी को आगे बढ़ाती हैं। इस बार दाव ज्यादा ऊंचे और विश्वासघात भी काफी अधिक हैं। राजनीति की बिसात में रानी अभी खेलना सीखने के साथ नियमों को फिर से लिखना सीख गई हैं।
कहाँ से शुरु होती हैं ‘महारानी सीजन 4’ की कहानी?- Kahan se shuru hoti hain Maharani Season 4 ki kahani?
इस फिल्म की कहानी की शुरुआत दिल्ली के भव्य गलियारों से होती हैं। गठबंधन सरकार चला रहे प्रधानमंत्री सुधाकर श्रीनिवास जोशी का एक प्रमुख सहयोगी उसकी सरकार से समर्थन वापस लेता हैं, जिससे उसका शासन डगमगा जाता हैं। अपनी सत्ता बचाने के लिए बेताब, वह क्षेत्रीय नेताओं की और रुख करता हैं, जिनमें बिहार की मुख्यमंत्री रानी भारती शामिल हैं।

वह सार्वजनिक रुप से मना कर देती हैं। टकराव बढ़ने पर रानी उससे मिलने उसके घर जाती हैं। वहाँ सत्ते के नशे में चूर जोशी का व्यवहार रानी को आहत करता हैं।
रानी अगली प्रधानमंत्री बनने की कसम खाती हैं, गौरव के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान के लिए। केंद्र की राहें आसान नहीं हैं। राजनीतिक गतिरोधों के बीच रानी बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देती हैं और अपनी बेटी रोशनी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करती हैं।
यह बात उसके बेटे जयप्रकाश भारती और पार्टी के एक धड़े को रास नहीं आती हैं। वहीं रानी का दूसरा बेटा सूर्या राजनीति की दुनिया से दूर लंदन में पढ़ाई कर रहा हैं। परिवार में बढ़ते गतिरोध के बीच जयप्रकाश को रानी दिल्ली का प्रबंधन संभालने की जिम्मेदारी देती हैं। इससे प्रार्टी के पुराने सहयोगियों में असंतोष पैदा होता हैं।
जानिए जस्सी वेड्स जस्सी फिल्म की कहानी के बारे में।
हर पहलू को बढ़ी बारीकी से गढ़ा- Har pehlu ko badhi bariki se gadha
इस बार सीरिज़ के निर्देशन की बागडोर पुनीत प्रकाश ने संभाली हैं। सुभाष कपूर और नंदन सिंह की लिखी कहानी और स्क्रीनप्ले में उन्होंने क्षेत्रीय दलों को मौकापरस्ती, सत्ता को लेकर लालच, मोलभाव करना के साथ सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एंजेसियों का डराने-धमकाने के औजारों के रुप में दुरुपयोग, जैसे पहलुओं को कहानी में बारीकी से गढ़ा हैं।

सुभाष कपूर द्वारा क्रिएट किए गई महारानी की दुनिया में राजनीतिक उठापठक के साथ रानी की पारिवारिक कहानी को बारीकी से गूंथा गया हैं।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता के साथ यह एक प्रकार से प्रतिशोध की कहानी बन गई हैं। भले ही यह काल्पनिक सीरिज़ हैं लेकिन कुछ प्रसंग भारतीय राजनीतिक के घटनाक्रमों की याद दिलाएंगे।
सीरिज़ के कई संवाद दमदार और चुटकीले हैं। संगीत कथ्य को गाढ़ा करने में अहम भूमिका निभाता हैं। आनंद एस. बाजपेयी का बिहार की लोक परंपराओं से निकले “हमार भैया” और “सुगनवा” बिहार का स्थानीय रस देते हैं।
आवश्यक जानकारी:- हक़ फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
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