आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं छठ फिल्म के बारे में। अब हम आपसे छठ फिल्म के बारे में बात करें तो जानी मानी एक्ट्रेस नीतू चंद्रा अपने भाई और निर्देशक नितिन नीश चंद्रा के साथ एक नई फिल्म लेकर आई हैं, जिसका नाम हैं छठ।
24 अक्टूबर को डिजिटल प्लेटफॉर्म वेव्स पर रिलीज़ रही उनकी फिल्म ‘छठ’ असल में भोजपुरी सिनेमा और पारिवारिक रिश्तों के बारे में बताती हैं। छठ पर्व मनाने के साथ घर-परिवार और आपसी रिश्तों के ताने बाने में गढ़ी फिल्म अपनों अहमियत को बखूबी बताती हैं।
भोजपुरी फिल्मों या गानों का जिक्र आते ही दिमाग में सबसे पहले यही आता हैं की उसमें कितनी अश्लीलता और फूहड़ता होती हैं। ऊपर से द्विअर्थी संवाद। इन सब चलते लोग अपने ही परिवार के साथ भोजपुरी फिल्में या गाने देखने से कतराते हैं।
वहीं मैथिली फिल्म श्रेणी के तहत मिथिला मखान के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी नीतू चंद्रा अपने भाई और निर्देशक नितिन नीरा चंद्रा के साथ अपनी फिल्मों के जरिए इस छवि को बदलने का सार्थक प्रयास कर रहा हैं।
24 अक्टूबर को डिजिटल प्लेटफॉर्म वेव्स पर रिलीज़ रही उनकी फिल्म ‘छठ’ इसकी ताज़ा मिसाल हैं। छठ पर्व मनाने के साथ पारिवारिक रिश्ते के ताने बाने में गढ़ी फिल्म परिवार की अहमियत को बखूबी बताती हैं।
क्या हैं छठ फिल्म की कहानी?- Kya hain Chhath film ki kahani?
इस फिल्म की कहानी बिहार के एक गाँव में सेट हैं। गोविंद अपनी माँ, पत्नी ज्योति के साथ रहता हैं। उनके दो बेटे मोतिहारी में पढ़ रहे हैं। एक बेटा छठ के बाद परीक्षा के कारण नहीं आ पाया हैं। 25 साल बाद गोविंद का पूरा परिवार छठ के अवसर पर इकट्ठा हो रहा हैं।

उनकी तीन बहनें अपने पति और बच्चों के साथ तो भतीजा मोहित अपनी नवविवाहित पत्नी नीलांजन के साथ आ जाता हैं। मोहित अमेरिका में कार्यरत हैं। मोहित के माता-पिता का निधन हो चुका हैं। गोविंद का मोहित के जन्म के बाद से ही गहरा जुड़ाव रहा हैं। स्वजनों के एकत्र होने पर बचपन की यादें ताज़ा होती हैं।
नीलांजन को मोहित अपनी जमीन दिखाने के लिए लाता हैं, लेकिन वहाँ पर छोटी-सी बिल्डिंग बनी होती हैं, जिसमें क्लीनिक चल रहा हैं और बाद में यह बात मोहित को खटकती हैं। दूर के रिश्तेदार से उसको पता चलता हैं की इस क्लीनिक से उसके चाचा को अच्छा किराया मिल रहा हैं।
मोहित को यह बात बुरी लगती हैं की चाचा ने बिना बताए उसकी जमीन पर क्लीनिक बना दिया। उसको लगता हैं की चाचा ने उसकी जमीन हड़प ली हैं। इन सब के बाद वह चाचा से मकान गिराने या चार साल का किराया करीब छह लाख रुपये देने की शर्त रखता हैं। वहाँ से घर का माहौल तनावपूर्ण होता हैं।
ये परिवार दो खेमों में बंट जाता हैं। मोहित को कई बार गोविंद समझाने का प्रयास करता हैं लेकिन वह सुनने को राजी नहीं होता हैं।
जानिए एक दीवाने की दीवानियत फिल्म की कहानी के बारे में।
क्या सच में गोविंद ने जमीन हड़पी हैं?- Kya sach mein govind ne jamin hadpi hain?
इस फिल्म के निर्देशक नितिन नीरा चंद्रा ने छठ के पावन पर्व के साथ पारिवारिक रिश्तों, उनके बीच आपसी मनमुटाव, बिहार से बाहर रह रही नई पीढ़ी के सोच-विचार, तौर-तरीकों को बारीकी से छुआ हैं। शुरुआत से वह अंत तक कहानी पर पकड़ बनाए रखते हैं। इस फिल्म की शूटिंग गाँव में हुई हैं तो माहौल वास्तविक लगता हैं।

शुरुआत में परिवार के सदस्यों के एकत्र होने के साथ नितिन छठ की तैयारी के साथ गोविंद और उसके परिवार की दुनिया में ले जाते हैं। नई नवेली बहू अगर ठीक से पल्लू न करें, बिछिया न पहने तो बुआ का ताने देना, खानपान में मीनमेख निकालने वाले फूफा, बहनों का आपस में अपनी ही भाभी की खिल्ली उड़ाना, भाई बहनों के बीच आपसी नोकझोंक जैसे पहलुओं को बहुत बारीकी से दिखाया हैं।
आवश्यक जानकारी:- थामा फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं छठ फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको छठ फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी।
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