आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं दे दे प्यार दे 2 फिल्म के बारे में। अब हम आपसे दे दे प्यार दे 2 फिल्म के बारे में बात करें तो अजय देवगन और रकुलप्रीत सिंह स्टारर मूवी दे दे प्यार दे 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई हैं। यह फिल्म 2019 में आई दे दे प्यार दे का सीक्वल हैं।
प्यार में उम्र के फासले मायने नहीं रखते हैं। साल 2019 में आई दे दे प्यार दए की कहानी ऐसे ही दो प्रेमियों के बीच थी। इस कहानी का नायक आशीष लंदन में रहता हैं। भारत से लंदन पढ़ाई करने गई आयशा अपने खर्च निकालने के लिए बार में काम करती हैं।
ये दोनों मिलते हैं और एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। आशीष उसको अपनी पत्नी मंजू और दो बच्चे और परिवार से मिलवाने भारत आया हैं। उसकी बेटी की उम्र आयशा के आसपास हैं। आयशा और आशीष की प्रेम कहानी यहीं उलझती हैं।
दे दे प्यार दे से आगे बढ़ती हैं सीक्वल की कहानी- De De Pyar De se age badhti hain sequal ki kahani
अभी करीब छह साल बाद आई इसकी सीक्वल दे दे प्यार दे 2 की कहानी में आयशा इस बार आशीष को अपने परिवार से मिलवाने लंदन से चंडीगढ़ बुलाती हैं।

आयशा की भाभी किट्टू माँ बनने वाली होती हैं। आयशा उसको आशीष के बारे में बताती हैं। किट्टू के पेट में बात नहीं पचती हैं। वह आयशा के पिता राकेश और माँ अंजू को बताती हैं।
स्वयं को आधुनिक और प्रगतिशील माता-पिता बताने वाले राकेश और अंजू अपनी लाडली बेटी से आशीष को बुलाने को कहते हैं। 27 साल की आयशा उन्हें यह नहीं बताती हैं की आशीष 52 साल का हैं।
वह बस इतना बताती हैं की आशीष उससे उम्र में बड़ा हैं। आशीष जब उनसे मिलने पहुँचता हैं तब राकेश और अंजू उसे देखकर चौंकते हैं। वह उनका हमउम्र होता हैं। राकेश इस रिश्ते के खिलाफ होता हैं। आयशा विद्रोह करती हैं और घर छोड़कर चली जाती हैं।
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सेकंड हाफ में निर्देशक की कोशिश नाकाम- Second half mein nirdeshak ki koshish nakam
इस फिल्म के निर्देशक अंशुल शर्मा, रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक डामा का संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन एकरुपता बनाए रखने में नाकाम रहते हैं। लव रंजन और तरुण जैन की लिखी कहानी मध्यांतर से पहले काफी गुदगुदाती हैं।

आशीष को देखकर राकेश और अंजू का बिदकना। उसकी उम्र जानने की बेकरारी से लेकर आशीष का अंजू को मम्मी जी, भाभी जी या बहन जी बुलाना जैसे कई दृश्य मज़ेदार हैं।
यह फिल्म मध्यांतर के बाद लड़खड़ा जाती हैं। आयशा और आशीष के प्यार का आधार तार्किक नहीं बन पाया हैं। इस फिल्म में आयशा बार-बार कहती हैं की क्या एक बार सोने से प्यार हो जाता हैं… तो एक बार सोने से खो कैसे जाता हैं? क्या यह प्यार का आधार हो सकता हैं? यह सवाल मन में कई बार उठता हैं।
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निष्कर्ष- Conclusion
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