आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब फिल्म के बारे में। अब हम आपसे रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब फिल्म के बारे में बात करें तो रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब एक संघर्ष और उम्मीद की कहानी को सामने लाता हैं। यह क्लब कश्मीर के नए पहलू को दिखाता हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, क्लब ने युवाओं को एक मंच प्रदान किया हुआ हैं। खेल के माध्यम से यह टीम घाटी में सकारात्मक बदलाव को लाने का प्रयास कर रही हैं। क्लब की यात्रा प्रेरणादायक हैं।
इस सीरिज़ की शुरुआत में एक संवाद हैं की फुटबॉल से कश्मीर के युवाओं को उम्मीद और एक नया मकसद मिलेगा। बदलाव के लिए इतना काफी हैं। यह पंक्ति इस शो की आत्मा को बयान करती हैं। यह संवाद बताता हैं की आतंकवाद, पत्थरबाजी और कट्टरपंथ से जूझते कश्मीर में अगए युवाओं को कोई सार्थक लक्ष्य मिल जाए तब उनकी दिशा बदली जा सकती हैं।
यह वेब सीरिज़ उन कट्टरपंथियों को कटघरे में लाती हैं जो धर्म, बेरोजगारी और असंतोष की आड़ में युवाओ6 को गुमराह कर रहे हैं। वास्तव में यह सीरिज़ साल 2006 में रियल कश्मीर एफसी के संस्थापक पत्रकार शमीम मेराज और बिजनेसमैन संदीप चट्टू से प्रेरित हैं।
क्या हैं ‘रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब’ की कहानी?- Kya hain Royal Kashmir Football Club ki kahani?
इस सीरिज़ की शुरुआत शराब कारोबारी शिरीष खेमू की दुकान के बाहर हो रहे विरोध-प्रदर्शन से हो जाती हैं। बाद में पत्रकार सोहेल मीर से परिचय हो जाता हैं जो टीवी पर कश्मीरी फुटबॉलर अजलान शाह को देखकर प्रफुल्लित हो जाता हैं। सोहेल अपनी नौकरी छोड़कर घाटी में पहला प्रोफेशनल फुटबॉल क्लब शुरु करने का सपना देखता हैं, ताकि युवाओं की जिंदगी में किसी सकारात्मक बदलाव की नींव रखी जा सकें।

परिवार और समाज दोनों ही स्तर पर उसको शुरुआत में विरोध झेलना पड़ता हैं। यहीं उसकी मुलाकात शिरीष के साथ होती हैं जो कट्टर नेता नजीर डार के निशाने पर होता हैं।
सोहेल का जुनून और ईमानदारी शिरीष को प्रभावित करती हैं और यह क्लब को फंड देने के लिए तैयार होता हैं, बशर्तें सोहेल खिलाड़ियों और कोच की व्यवस्था करे। सोहेल अपने दोस्त और फुटबॉल कोच रह चुके मुस्तफा को साथ जोड़ता हैं जो टीम को आकार देने की जिम्मेदारी संभालता हैं।
जानिए धुरंधर फिल्म की कहानी के बारे में।
कश्मीर की झील से निकलकर आम जिंदगी की कहानी दर्शाती- Kashmir ki jheel se nikalkar am Zindagi ki kahani darshati
इस कहानी के निर्देशक महेश मथाई और राजेश मापुस्कर कहानी के जरिए कश्मीर को केवल डल झील, बर्फ या आतंक की पृष्ठभूमि से आगे ले जाकर आम लोगों की जिंदगी, उनके डर, सपनों और आतंरिक संघर्षों को दिखाने का प्रयास करते हैं।

लेखक सिमाव हाशमी, दानिश रेंजू, ध्रुव नारंग और उमंग व्यास ने भले ही कश्मीर की बड़ी और जटिल सच्चाइयों को सीधे सामने लाने से परहेज किया गया हो, लेकिन खिलाड़ियों के जरिए बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य मौजूदगी और गुमराह होते युवक जैसे मुद्दों को काफी संतुलित और संयमित तरीके से पेश किया हुआ हैं।
विदेशी कोच डगलस गार्डन की मौजूदगी थोड़ा जोश लाती हैं। इसके साथ ही बहुत कुछ संवादों से कह जाती हैं। कई दृश्य अनावश्यक रुप से खींचे गए लगते हैं। शो कश्मीरी पंडित शिरीष के आंतरिक द्वंद्व दिखाती हैं जो दर्शकों बाद अपने बचपन के घर लौटने का प्रयास करता हैं, लेकिन गहराई में नहीं जाती हैं।
सोहेल और शिरीष के रिश्तों को थोड़ा और गहराई से दर्शाने की आवश्यकता थी। यह कहानी अजलान शाह, दिलशाद गोलकीपर रुद्र रैना के साथ बाकी खिलाड़ी की निजी जिंदगी और उनके संघर्ष को बताती हैं पर झकझोरती नहीं हैं। वास्तव में यह कोई रोमांच से भरा स्पोर्ट्स ड्रामा नही हैं। इसकी रफ्तार धीमी हैं लेकिन भावनात्मक प्रभाव गहरा हैं।
आवश्यक जानकारी:- तेरे इश्क में फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होंगी। इस जानकारी से आपको रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ जरुर प्राप्त होंगी।
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