महाभारतकालीन पिहोवा पशुपति नाथ मंदिर का रहस्य

Vineet Bansal

आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के बारे में। अब हम आपसे श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के बारे में बात करें तो हिंदू धर्म में श्री पशुपति नाथ महादेव का मंदिर शिव भक्तों के प्रमुख तीर्थों में से एक हैं। शिव जी का यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरुप को समर्पित हैं- अर्थात्‌ “समस्त जीवों के स्वामी”।

Contents
श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर का परिचय- Shree Pashupati Nath Mahadev Mandir ka parichayपिहोवा में पशुपतिनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्तव- Pehowa mein Pashupatinath Mandir ka aitihasik mahatvaऐतिहासिक महत्तवमंदिर की स्थापना और प्राचीन कथा- Mandir ki sthapna aur prachin kathaस्थापना की कथापंचमुखी शिवलिंग की पौराणिकतामहाराजा रणजीत सिंह का योगदानतीर्थ रुप में मान्यतामहाभारत के भीम का श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर से संबंध- Mahabharat ke bheem ka shree pashupatinath mahadev mandir se sambandhपिहोवा का महाभारतकालीन महत्तवभीम और भगवान शिव की कथा का पिहोवा से संबंधभीम ने पिहोवा में कठोर तप कियापंचमुखी शक्ति की उपासनालोकमान्यता: भीम और पशुपति स्वरुपक्यों माना जाता हैं पांडव यहाँ आए थे?मंदिर में भीम का उल्लेखनेपाल के पशुपतिनाथ और पिहोवा पशुपतिनाथ मंदिर का संबंध- Nepal ke pashupatinath aur pehowa pashupatinath mandir ka sambandhदोनों मंदिर भगवान शिव के “पशुपति” स्वरुप को समर्पितपिहोवा का पंचमुखी शिवलिंग नेपाल की परंपरा से प्रेरितबाबा श्रवणनाथ जी द्वारा नेपाल से लाई गई परंपरादोनों स्थान शैव तांत्रिक साधना का केंद्रभक्तों की मान्यता: नेपाल के बाद पिहोवापिहोवा के आसपास के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल- Pehowa ke aspas ke any prasidh tirth sthalपिहोवा प्राचीन सरस्वती तटकुरुक्षेत्रज्योतिसरप्राचीन पृथुदक स्थलसरस्वती तीर्थनिष्कर्ष- Conclusion

पशुपति नाथ मंदिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा कस्बे में स्थित हैं। पिहोवा का पुराना नाम पृथुदक तीर्थ भी हैं। यह कहा जाता हैं की भारत में पशुपतिनाथ का यह मंदिर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के बाद दूसरा प्रमुख मंदिर हैं।

साधु समाज मानता हैं की 12 ज्योतिर्लिंगों दर्शन के बाद यहाँ के पशुपतिनाथ महादेव के दर्शन अनिवार्य हैं। अब हम आपसे चर्चा करेंगे श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के परिचय के बारे में।

श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर का परिचय- Shree Pashupati Nath Mahadev Mandir ka parichay

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के परिचय के बारे में। अब हम आपसे श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के परिचय के बारे में बात करें तो हरियाणा राज्य के ऐतिहासिक और पवित्र नगर पिहोवा में स्थित श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर एक अत्यंत प्रतिष्ठित शिवधाम हैं।

Shree Pashupati Nath Mahadev Mandir ka parichay

शिव जी का यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरुप को समर्पित हैं जो समस्त जीव-जगत के स्वामी कहलाते हैं। प्राचीनकाल में पिहोवा पृथुदक तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध था और यह कुरुक्षेत्र के 48 कोस परिक्रमा क्षेत्र का एक प्रमुख तीर्थ हैं। इसी पवित्र भूमि पर स्थापित पशुपतिनाथ महादेव मंदिर अपनी दिव्यता, शक्ति और आस्था के लिए प्रसिद्ध हैं।

इस मंदिर का विशेष आकर्षण यहाँ स्थित कसौटी पत्थर से बना पंचमुखी शिवलिंग हैं जो अपनी दुर्लभता और आध्यात्मिक महत्तव के कारण अद्भुत माना जाता हैं। यह पंचमुखी शिवलिंग नेपाल के काठमांडू स्थित विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर को स्मरण दिलाता हैं। इसलिए पिहोवा का पशुपतिनाथ मंदिर भारत में दूसरा प्रमुख पशुपतिनाथ धाम माना जाता हैं।

इस मंदिर का वातावरण अत्यंत साधना-प्रधान, शांति से परिपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर हैं। यहाँ प्रतिदिन होने वाली आरतियाँ, भजन और विशेष पर्वों के आयोजन भक्तों को दिव्य अनुभूति प्रदान करते हैं। यहाँ महाशिवरात्रि तथा सावन मास में विशाल श्रद्धालु समुदाय दर्शन के लिए पहुँचता हैं।

पिहोवा का यह मंदिर न सिर्फ शिवभक्तों के लिए शक्तिपीठ हैं बल्कि यह सांस्कृतिक और पौराणिक महत्तव का भी केंद्र हैं। जहाँ आस्था, इतिहास और आध्यात्मिकता मिलकर एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। अब हम आपसे चर्चा करेंगे पिहोवा में पशुपतिनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्तव के बारे में।

पिहोवा में पशुपतिनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्तव- Pehowa mein Pashupatinath Mandir ka aitihasik mahatva

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं पिहोवा में पशुपतिनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्तव के बारे में। अब हम आपसे पिहोवा में पशुपतिनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्तव के बारे में बात करें तो पिहोवा का पशुपतिनाथ महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिकता और आस्था तीनों का अनोखा संगम हैं।

Pehowa mein Pashupatinath Mandir ka aitihasik mahatva

कुरुक्षेत्र के 48 कोस तीर्थ क्षेत्र में स्थित पिहोवा प्राचीन समय में पृथुदक तीर्थ कहलाता था, जिसका उल्लेख महाभारत और पुराणों में भी मिलता हैं। यह स्थान पिंडदान, श्राद्ध और तीर्थ-सेवा के लिए हज़ारों वर्षों से अत्यंत पवित्र माना जाता रहा हैं। इस पावन भूमि पर स्थित श्री पशुपतिनाथ महादेव का यह प्राचीन मंदिर हिंदू शैव परंपरा का एक महत्तवपूर्ण केंद्र हैं।

इतिहास के अनुसार लगभग 300 वर्ष पहले नेपाल से आए साधु बाबा श्रवण नाथ जी ने पिहोवा में शिवभक्ति और तांत्रिक साधना के प्रसार हेतु इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। बाद में मंदिर का विस्तार और सौंदर्यकरण पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह द्वारा लगभग 1763 ईस्वी में करवाया गया, जिससे यह मंदिर अधिक प्रसिद्ध हुआ।

ऐतिहासिक महत्तव

मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग कसौटी पत्थर की एक ही चट्टान से बना हैं जो अपनी दुर्लभता के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से अति मूल्यवान माना जाता हैं। कसौटी पत्थर से बने ऐसे शिवलिंग भारत में बहुत कम मिलते हैं। इसके पंचमुखी स्वरुप की वजह से यह नेपाल के काठमांडू स्थित विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की परंपरा से सीधे जुड़ता हैं।

इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों में पिहोवा को आत्मामोक्ष का स्थान बताया गया हैं, जहाँ से आत्मा को मुक्ति का मार्ग मिलता हैं।

इस ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि ने पिहोवा के पशुपतिनाथ मंदिर को अधिक महत्तवपूर्ण बना दिया हैं। मंदिर को प्राचीनता, स्थापत्य कला और उससे संबंधित आध्यात्मिक परंपराएँ इस बात का सबूत हैं की यह धाम न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र हैं बल्कि इतिहास का जीवंत अध्याय भी हैं। अब हम आपसे चर्चा करेंगे मंदिर की स्थापना और प्राचीन कथा के बारे में।

जानिए बनभौरी माता मंदिर की पौराणिक कथा के बारे में।

मंदिर की स्थापना और प्राचीन कथा- Mandir ki sthapna aur prachin katha

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं मंदिर की स्थापना और प्राचीन कथा के बारे में। अब हम आपसे मंदिर की स्थापना और प्राचीन कथा के बारे में बात करें तो पिहोवा के श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर की स्थापना से संबंधित कथा अत्यंत रोचक, पवित्र और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण हैं।

Mandir ki sthapna aur pramukh prachin katha

लगभग तीन सदियों पहले इस क्षेत्र में तपस्या करने वाले एक महान सिद्ध संत बाबा श्रवणनाथ जी नेपाल में स्थित विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ धाम की यात्रा के पश्चात्‌ पिहोवा आए।

अपने दिव्य अनुभव और साधना के प्रभाव से वे पिहोवा की भूमि को आध्यात्मिक रुप से अत्यंत पवित्र स्थान मानते थे और यहीं ध्यान साधना में लीन हो गए।

स्थापना की कथा

कथा के अनुसार बाबा श्रवणनाथ जी को ध्यान में दिव्य आदेश प्राप्त हुआ की पिहोवा में भी भगवान पशुपतिनाथ का धाम स्थापित होना चाहिए, जिससे इस तीर्थ पर आने वाले भक्तों को शिव के विशेष पशुपति रुप का आशीर्वाद प्राप्त हो सकें।

इस दिव्य प्रेरणा से उन्होंने एक दुर्लभ कसौटी पत्थर की विशाल शिला प्राप्त की, जिससे पंचमुखी शिवलिंग की स्थापना की गई। यह शिवलिंग एक ही पत्थर से निर्मित होने के कारण अत्यंत अद्वितीय और चमत्कारिक माना जाता हैं।

पंचमुखी शिवलिंग की पौराणिकता

पौराणिक कथाओं में पंचमुखी रुप शिव के पाँच स्वरुपों को बताता हैं-

  • ईशान
  • तत्पुरुष
  • अघोर
  • वामदेव
  • सद्योजोत

जब पंचमुखी शिवलिंग की स्थापना हुई, उस समय मंदिर परिसर में दिव्य प्रकाश और सुगंध फैल गई थी, जिसे स्थानीय जनों ने चमत्कार के रुप में देखा।

महाराजा रणजीत सिंह का योगदान

स्थापना के वर्षों के बाद इस पवित्र स्थान की कीर्ति दूर-दूर तक फैलने लगी। इस दौरान महाराजा रणजीत सिंह यहाँ आए और इस धाम से प्रभावित होकर मंदिर के पुनर्निमाण और सजावट का काम करवाया। आज का भव्य मंदिर उस परिवर्तन का परिणाम हैं।

तीर्थ रुप में मान्यता

यह कहा जाता हैं की प्राचीन काल में यहाँ पर महर्षि एवं साधु पिंडदान और यज्ञ अनुष्ठान करते थे। इस मंदिर की स्थापना के बाद यह स्थान और ज्यादा पवित्र माना जाने लगा और पिहोवा के पृथुदक तीर्थ को नई आध्यात्मिक पहचान मिली। अब हम आपसे चर्चा करेंगे महाभारत के भीम का श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर से संबंध के बारे में।

महाभारत के भीम का श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर से संबंध- Mahabharat ke bheem ka shree pashupatinath mahadev mandir se sambandh

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं महाभारत के भीम का श्रीपशुपतिनाथ महादेव मंदिर से संबंध के बारे में। अब हम आपसे महाभारत के भीम का श्रीपशुपतिनाथ महादेव मंदिर से संबंध के बारे में बात करें तो महाभारत काल में पिहोवा का उल्लेख मिलता हैं, और इस ऐतिहासिक-पौराणिक पृष्ठभूमि में भीम तथा पशुपतिनाथ महादेव से संबंधित एक प्रचलित कथा प्रचलित हैं।

Mahabharat ke bheem ka shree pashupatinath mahadev mandir se sambandh

यह कथा धार्मिक परंपरा, स्थानीय मान्यता और पुराणिक घटनाओं के आधार पर पीढ़ियों से सुनाई जाती हैं।

पिहोवा का महाभारतकालीन महत्तव

महाभारत में पिहोवा का वर्णन पिंडदान, तर्पण और आत्ममोक्ष के प्रमुख तीर्थ के रुप में मिलता हैं। पांडव यात्रा के दौरान इस स्थल पर आए थे- ऐसा स्थानीय परंपरा में माना जाता हैं। इस भूमि पर आगे चलकर पशुपतिनाथ महादेव का धाम स्थापित हुआ।

भीम और भगवान शिव की कथा का पिहोवा से संबंध

स्थानीय परंपराओं और कथा-परंपरा में एक मान्यता प्रचलित हैं की:-

भीम ने पिहोवा में कठोर तप किया

कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले जब पांडव तीर्थों की यात्रा कर रहे थे तब भीम ने इस स्थान पर भगवान शिव की उपासना और तर्पण का कार्य किया। यह माना जाता हैं की पवित्र पृथुदक तीर्थ में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भीम विशेष रुप से रुके थे।

पंचमुखी शक्ति की उपासना

यह कथा कहती हैं की भीम ने शिव के पंचस्वरुप का ध्यान किया था और आज पिहोवा में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग इसी परंपरा का प्रतीक माना जाता हैं। इसी वजह से स्थानीय लोग इस धाम को भीम के तपस्थल के रुप में देखते हैं।

लोकमान्यता: भीम और पशुपति स्वरुप

भीम की अपार शक्ति को पशुपति महादेव का आशीर्वाद माना गया हैं। वनों में रहकर दुष्ट राक्षसों से रक्षा करते समय भीम अक्सर शिव की अघोर शक्ति का ध्यान करते थे। पिहोवा का पशुपतिनाथ मंदिर भीम की उस शक्ति-उपासना से प्रेरित स्थान के रुप में देखा जाता हैं।

क्यों माना जाता हैं पांडव यहाँ आए थे?

पिहोवा का उल्लेख महाभारत में पवित्र सरस्वती क्षेत्र के रुप में मिलता हैं। कुरुक्षेत्र और पिहोवा एक ही तीर्थ-क्षेत्र का हिस्सा हैं। पांडवों ने पूरे क्षेत्र में तीर्थ-स्थान, दान और तप किया था। इस वजह से यह माना जाता हैं की भीम सहित पांडव इस स्थान से जुड़े हुए थे।

मंदिर में भीम का उल्लेख

पिहोवा में शिव जी की आराधना करने वाले पांडवों में भीम प्रमुख थे। पंचमुखी शिवलिंग की शक्ति-परंपरा भीम की पूजा-परंपरा से जुड़ी हुई मानी जाती हैं। अब हम आपसे चर्चा करेंगे नेपाल के पशुपतिनाथ और पिहोवा पशुपतिनाथ मंदिर के संबंध के बारे में।

यह भी पढ़े:- तिरुपति बालाजी मंदिर की पौराणिक कथा के बारे में।

नेपाल के पशुपतिनाथ और पिहोवा पशुपतिनाथ मंदिर का संबंध- Nepal ke pashupatinath aur pehowa pashupatinath mandir ka sambandh

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं नेपाल के पशुपतिनाथ और पिहोवा पशुपतिनाथ मंदिर के संबंध के बारे में। अब हम आपसे नेपाल के पशुपतिनाथ और पिहोवा पशुपतिनाथ मंदिर के संबंध के बारे में बात करें तो पिहोवा का श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर और नेपाल का विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर दोनों के बीच धार्मिक, आध्यात्मिक और परंपरागत रुप से एक गहरा संबंध माना जाता हैं।

Nepal ke pashupatinath aur pehowa pashupatinath mandir ka sambandh

यह संबंध सिर्फ नाम या स्वरुप का नहीं, बल्कि शैव परंपरा, पंचमुखी शिवरुप और साधु-संतों की परंपरा से गहराई से संबंधित हैं।

दोनों मंदिर भगवान शिव के “पशुपति” स्वरुप को समर्पित

नेपाल और पिहोवा दोनों ही धाम शिव के इस दिव्य पशुपति रुप की उपासना का केंद्र हैं। इन दोनों स्थानों पर पंचमुखी स्वरुप की प्रधानता हैं जो शिव के पंच रुपों ईशान, तत्पुरुष, वामदेव, अघोर और सद्योजात का प्रतीक हैं।

पिहोवा का पंचमुखी शिवलिंग नेपाल की परंपरा से प्रेरित

पिहोवा मंदिर का शिवलिंग कसौटी पत्थर से बना, पंचमुखी रुप में स्थापित और एक ही चट्टान से निर्मित हैं। यह स्वरुप नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की प्राचीन परंपरा का प्रतिबिंब माना जाता हैं। इसलिए पिहोवा को “भारत का दूसरा पशुपतिनाथ धाम” कहते हैं।

बाबा श्रवणनाथ जी द्वारा नेपाल से लाई गई परंपरा

लगभग 300 वर्ष पहले बाबा श्रवणनाथ जी नेपाल में लंबे समय तक ध्यान-साधना करने के बाद पिहोवा आए। उन्हीं के द्वारा पशुपति परंपरा, पंचमुखी शिवरुप की पूजा, कसौटी पत्थर शिवलिंग स्थापना पिहोवा तक पहुँची। इसी प्रकार नेपाल की शैव परंपरा को पिहोवा में स्थापित करने का श्रेय इन्हीं सिद्ध पुरुष को जाता हैं।

दोनों स्थान शैव तांत्रिक साधना का केंद्र

नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर तंत्र-साधना और शैव मत का विश्वप्रसिद्ध केंद्र हैं। पिहोवा भी परंपरागत रुप से मंत्र साधना, पिंडदान, तर्पण और पंचमुखी शिव साधना के लिए महत्तवपूर्ण माना जाता हैं। इसी प्रकार दोनों धाम शैव और तांत्रिक परंपरा की समान धारा को आगे बढ़ाते हैं।

भक्तों की मान्यता: नेपाल के बाद पिहोवा

शिवभक्त मानते हैं की नेपाल के पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद पिहोवा के पशुपतिनाथ के दर्शन पूर्ण फल प्रदान करते हैं। इस कारण पिहोवा को द्वितीय पशुपतिनाथ तीर्थ कहते हैं। अब हम आपसे चर्चा करेंगे पिहोवा के आसपास के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के बारे में।

पिहोवा के आसपास के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल- Pehowa ke aspas ke any prasidh tirth sthal

अब हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं पिहोवा के आसपास के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के बारे में। अब हम आपसे पिहोवा के आसपास के अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के बारे में बात करें तो पिहोवा स्वयं कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा का एक महत्तवपूर्ण केंद्र हैं और इसके आसपास अनेक पौराणिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं।

Pehowa ke aspas ke any prasidh tirth sthal

ये सब स्थान महाभारत, पुराणों और वैदिक परंपरा से गहराई से जुड़े हुए हैं।

पिहोवा प्राचीन सरस्वती तट

पिहोवा के पास प्राचीन सरस्वती नदी का क्षेत्र मिलता हैं। यह वही स्थान हैं जहाँ पितरों के तर्पण का विधान बताया गया हैं। पांडवों और ऋषियों द्वारा यहाँ पिंडदान करने का उल्लेख मिलता हैं।

कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र भारत का सबसे प्रसिद्ध पवित्र स्थल हैं जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था। यहाँ प्रमुख तीर्थ हैं ब्रह्मासरोवर, ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर, भीष्म कुंड, कर्ण सरोवर, मत्खेड़ा तीर्थ और कुरुक्षेत्र मंदिर। कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र के नाम से जाना जाता हैं।

ज्योतिसर

यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यहाँ विशाल अक्षर की प्रतिमा, संगमरमर मंच और पीपल वृक्ष विशेष रुप से प्रसिद्ध हैं।

प्राचीन पृथुदक स्थल

पिहोवा का यह मुख्य तीर्थ पितृ तर्पण के लिए प्राचीन काल से पवित्र माना जाता हैं। पुराणों में इसे “मोक्ष प्रदान करने वाला तीर्थ” कहते हैं।

सरस्वती तीर्थ

जहाँ सरस्वती नदी प्राचीन काल में बहती थी। आज भी कई स्थानों पर सरस्वती धारा से जुड़े तीर्थ उपस्थित हैं। यह स्थल ज्ञान, वेदाध्ययन और यज्ञों का केंद्र रहा हैं।

आवश्यक जानकारी:- जीवदानी माता मंदिर की पौराणिक कथा के बारे में।

निष्कर्ष- Conclusion

ये हैं पशुपति नाथ महादेव मंदिर से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर की कथा से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ जरुर प्राप्त होंगी।

इस जानकारी से आपको इस मंदिर के बारे में हर प्रकार की पौराणिक कथाओं के बारे में हर प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी। अगर आपको हमारी दी हुई जानकारियाँ पसंद आए तो आप हमारी दी हुई जानकारियों को लाइक व कमेंट जरुर कर लें।

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