मस्ती के नाम पर एडल्ट जोक्स के साथ परोसी फूहड़ता

Vineet Bansal

आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं मस्ती 4 फिल्म के बारे में। अब हम आपसे मस्ती 4 फिल्म के बारे में बात करें तो सिनेमाघरों में विवेक ओबेरॉय, आफताब शिवदसानी और रितेश देशमुख की एडल्ट कॉमेडी ‘मस्ती 4’ रिलीज़ हो चुकी हैं। मिलाप झावेरी के निर्देशन में बनी इस मूवी में मेकर्स ने महिलाओं को बेवकूफ दिखाने ही नहीं, बल्कि एडल्ट जोक्स से फिल्म में डालने के चक्कर में कहानी का बंटाधार किया हैं।

हिंदी सिनेमा में एडल्ट कॉमेडी कम ही बनती हैं। उसके कई कारण होते हैं। हालांकि इसको बनाना आसान नहीं होता हैं, क्योंकि हंसाने और फूहड़ होने के बीच एक महिन रेखा होती हैं, जिसको पार नहीं करना होता हैं।

साल 2004 में रिलीज़ हुई मस्ती इस जोनर में पसंद की गई थी। इसके बाद इस फ्रेंचाइज़ को ग्रैंड मस्ती और ग्रैंड मस्ती के साथ आगे बढ़ाया गया हैं। अभी मस्ती 4 आई हैं।

लव वीजा के चक्कर में फंसे तीन दोस्त- Love visa ke chakkar mein fanse tin dost

इस फिल्म की कहानी में फिर तीनों दोस्त मीत, अमर और प्रेम की हैं, जो अपनी-अपनी पत्नियों से खुश नहीं हैं। उनका दोस्त कामराज उनसे कहता हैं की उसकी बीवी उसको लव वीजा देती हैं, जिसमें वह किसी भी लड़की के साथ समय बिता सकता हैं।

Love visa ke chakkar mein fanse tin dost

ये तीनों अपनी पत्नियों से लव वीजा मांगते हैं, जो उन्हें मिल जाता हैं। जब वह वापस लौटते हैं, तब उनकी पत्नियाँ भी लव वीजा मांगती हैं और वह छुट्टियों पर निकल जाती हैं। आपको आगे की कहानी के लिए फिल्म देखनी होगी।

जानिए द फैमिली मैन 3 वेब सीरिज़ की कहानी के बारे में।

महिलाओं से कारवाई हैं बेवकूफाना हरकतें- Mahila se karwai hai bewakoofiyaan harakaat

इससे पहले की मस्ती और ग्रैंड मस्ती की कहानी तुषार हिरानंदानी के साथ मिलकर लिख चुके हैं। वह इस दुनिया से वाकिफ थे, फिर भी इस एडल्ट कॉमेडी को बनाने में वह चूक गए हैं। न कहानी हैं, न स्क्रीनप्ले, न कोई यादगार गाना, न संवाद।

Mahila se karwai hai bewakoofiyaan harakaat

मिलाप ने कहा था की मस्ती 4 पहली मस्ती की तरह होगी। इस फिल्म की कहानी के मामले में यह बात सच हैं, क्योंकि सिचुएशन के मामले में फिल्म हूबहू पहली मस्ती जैसी हैं, लेकिन पहली मस्ती जैसी कोई मस्ती फिल्म में नहीं हैं। कॉमेडी फूहड़ हैं। महिला पात्र सिर्फ बिकनी पहले और बेवकूफाना हरकतें करने के लिए हैं।

संवाद में महिला पात्र का यह कहना की अकेली रहती हूँ, सुबह उठकर आई पिल खाती हूँ या मर जाएँ साली…. मिलाप और फारुख धोंडी के लेखन पर सवाल खड़े करती हैं की क्या कॉमेडी के नाम पर ऐसे संवाद लिखना लोगों को वाकई हंसाएगा।

आवश्यक जानकारी:- 120 बहादुर फिल्म की कहानी के बारे में।

निष्कर्ष- Conclusion

ये हैं मस्ती 4 फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको मस्ती 4 फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी।

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