आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं बारामुल्ला फिल्म के बारे में। अब हम आपसे बारामुल्ला फिल्म के बारे में बात करें तो कश्मीर की वादियों में छुपे रहस्यों और क्राइम को उजागर करने के साथ आदित्य सांबले ने इस फिल्म की कहानी में सुपरनैचुरल घटनाओं को पिरोया हैं। कश्मीरी पंडितों के दर्द और उनके साथ हुए अन्याय को डर और थ्रिल के साथ दिलचस्प बनाने का प्रयास किया गया हैं।
कश्मीर की वादियाँ जितनी खूबसूरत हैं उसमें उतने ही गहरे राज दफ्न हैं। खूबसूरती और कुदरत के साथ इस घाटी ने आतंकवाद, क्राइम, बच्चों का अपहरण, धर्म के लिए लड़ाई, कश्मीरी पंडितों का दर्द और ना जाने क्या-क्या देखा हैं।
इस मसलों को लेकर बॉलीवुड काफी मुखर रहा हैं। अक्सर भारतीय सिनेमा ने इन मुद्दों पर फिल्म बनाई जा चुकी हैं। लेकिन 7 नवंबर को रिलीज़ हुई मानव कौल स्टारर बारामुल्ला इन सबसे थोड़ी अलग हैं।
क्या हैं बारामूला की कहानी?- Kya hain Baramulla ki kahani?
बारामूला की कहानी एक बच्चे की किडनैपिंग से शुरु होती हैं लेकिन यह कोई आम किडनैपिंग नहीं हैं, क्योंकि यह एक जादूगर के द्वारा की गई हैं। इस किडनैपिंग में एक सुराग भी छोड़ा जाता हैं और वह हैं नालों का एक गुच्छा। इन सब के साथ ही यह बच्चा भी कोई आम बच्चा नहीं हैं बल्कि बारामूला के एमएलए का बेटा हैं।

इस किडनैपिंग की स्पेशल जांच के लिए डीएसपी रिदवान सैय्यद को बारामूला बुलाया जाता हैं। जिसका किरदार मानव कौल ने निभाया हैं। इन सब के बाद बारामूला में और भी बच्चों का अपहरण किया जाता हैं।
इस बीच जिस घर में रिदवान की फैमिली ठहरती हैं उसमें कुछ सुपरनैचुरल घटनाएँ उसकी पत्नी और बच्चों के साथ घटती हैं। रिदवान इन सबमें नहीं मानता और अपनी इन्वेस्टिगेशन पर ध्यान देता हैं। ये सुपरनैचुरल घटनाएँ उन बच्चों के रहस्यमयी अपहरण से कैसे जुड़ती हैं यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
जानिए जटाधारा फिल्म की कहानी के बारे में।
कश्मीर पर आधारित बाकी फिल्मों से अलग- Kashmir par aadharit baki Film se alag
कश्मीर की वादियों की सच्चाई और दर्द को कई फिल्मों में दिखाया गया हैं। आर्टिकल 370 बनाने वाले डायेरक्टर आदित्य सुहास जांबले ने बारामूला की सच्चाई को सुपरनैचुरल घटनाओं के साथ एक नया एंगल देने का प्रयास किया हैं।

यह फिल्म अतीत और वर्तमान को साथ लेकर चलती हैं जिसमें कई सीन आपको इमोशनल भी कर देते हैं। लेकिन कई जगह पर आपको कंफ्यूज भी करती हैं, जो इसकी कमज़ोर स्क्रिप्ट राइटिंग को बताता हैं।
दूसरी और फिल्म काफी अंधेरे में चलती हैं। यह माना जाता हैं की फिल्म डरावनी हैं और इसमें भूत के साए भी हैं जो डार्कनेस की मांग करते हैं लेकिन कश्मीर में शूट हुई फिल्म पूरी तरह से अंधेरे में दिखती हैं जो इसमें दिलचस्पी कम करती हैं। सिनेमैटोग्राफी थोड़ी बहेतर हो सकती थी।
आवश्यक जानकारी:- हक़ फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं बारामूला फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको बारामूला फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ जरुर पसंद आई होगी।
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