आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं द ताज स्टोरी फिल्म के बारे में। अब हम आपसे द ताज स्टोरी फिल्म के बारे में बात करें तो परेश रावल की कोर्टरुप ड्रामा फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ काफी विवादों में घिरने के बाद आखिरकार ऑडियंस तक पहुँच गई हैं।
इस फिल्म की कहानी एक गाइड की हैं जो ताजमहल का इतिहास वास्तविकता में क्या हैं, इसको जानते के इच्छुक होता हैं। इस फिल्म में शुरुआत से लेकर अंत तक इस मूवी को देखते हुए आपके दिमाग में कई सवाल खड़े होंगे।
साल 1963 में रिलीज़ हुई फिल्म ताजमहल का एक प्रसिद्ध गीत होता हैं की ‘जमी भी तेरी हैं हम भी तेरे, यह मिलकियत का सवाल क्या हैं।’ यह फिल्म द ताज स्टोरी विश्व धरोहर और दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल की मिलकियत पर सवाल उठाती हैं।
इतिहास की किताबों में यह जिक्र किया गया हैं की उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल को 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी दूसरी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। इस महल के अंदर उनका एक मकबरा भी हैं। लेकिन यह फिल्म सवाल उठाती हैं की ताजमहल को शाहजहाँ ने नहीं बनवाया हैं।
इस सच को उजागर करती हैं ‘द ताज स्टोरी’- Is Sach ko ujagar karti hai ‘The Taj Story’
इस फिल्म की कहानी साल 1959 में आगरा से शुरु होती हैं। ताजमहल के निचले हिस्से में मरम्मत का काम चल रहा हैं। दीवार की एक दरार को दुरुस्त करने के लिए जैसी ही ईंटे निकाली जाती हैं, उसके पीछे की चीज़ें देखकर वहाँ मौजूद लोगों के होश उड़ते हैं। इस फिल्म की कहानी वहाँ से साल 2023 में आ जाती हैं।

विष्णु दास और उसका बेटा अविनाश ताजमहल में गाइड का काम करते हैं। विष्णु गाइड एसोशिएशन के अध्यक्ष के लिए चुनाव लड़ने वाला होता हैं। अमेरिकन डॉक्यूमेंट्री के लिए इंटरव्यू देते समय जब उससे ताजमहल के निचले हिस्से में बने कमरों का सच पूछा जाता हैं तब वह ऐसे किसी बात से मना करता हैं।
वह अंदर से जानता हैं की उनके पीछे कोई राज हैं। नशे की हालत में वह कहता हैं की ताजमहल का डीएनए टेस्ट करना चाहिए। विष्णु का वीडियों वायरल हो जाता हैं।
गाइड एसोसिएशन उसके विरुद्ध हो जाते हैं। यह मामला अदालत तक पहुँच जाता हैं। विष्णु सरकार, शिक्षा विभाग से लेकर पुरातत्व विभाग तक सब पर याचिका दायर करता हैं।
जानिए सिंगल सलमा फिल्म की कहानी के बारे में।
दमदार डायलॉग्स के साथ बांधे रखेगी कहानी- Damdar dialogues ke sath bandhe rakhegi kahani
इस फिल्म की कहानी फिल्म के निर्देशक तुषार ने लिखी हैं। उन्होंने भले ही शुरुआत में बता दिया हो की यह काल्पनिक कहानी हैं, लेकिन फिल्म के अंत में कुछ अखबारों की लेखों द्वारा उन्होंने कई याचिकाओं का जिक्र कर फिल्म की कहानी को आधार देने की कोशिश की हैं।

उन याचिकाओं में ताजमहल को कभी मंदिर घोषित करने, कभी वहाँ जलाभिषेक और आरती करने तो कभी 22 कमरों में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ होने की आकांक्षाओं और इस्लामिक गतिविधियों को रोकने का जिक्र किया गया हैं। जिनमें से कई याचिकाएँ विराचाधीन और लंबित हैं।
उन्होंने यही चतुराई इस फिल्म के अंत में भी दिखाई हुई हैं, जहाँ इस फिल्म को किसी एक धर्म की तरफ न करके संतुलित कर दिया हैं। कुछ सवाल अवश्य उठाए गए हैं, लेकिन ताजमहल के विश्व धरोहर होने के सम्मान और पर्यटकों के लिए उसकी अहमियत को प्रतिपक्षी वकील द्वारा संभाला गया हैं। इस फिल्म की पटकथा और संवाद तुषार के साथ सौरभ एम पांडे ने लिखी हैं। स्क्रीनप्ले बांधे रखता हैं।
आवश्यक जानकारी:- छठ फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं द ताज स्टोरी फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको द ताज स्टोरी फिल्म की कहानी से संबंधित कई प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी।
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