आज हम आपसे चर्चा करने जा रहे हैं सुनी संस्कारी की तुलसी कुमारी फिल्म के बारे में। अब हम आपसे सुनी संस्कारी की तुलसी कुमारी फिल्म के बारे में बात करें तो वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की रोमांटिक कॉमेडी ड्रामा फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी देखकर दर्शकों के मन में कई सवाल उत्पन्न हुए हैं। दशहरा के अवसर पर रिलीज़ इस फिल्म में शंशाक खैतान ने कुछ नया करने का प्रयास किया हैं।
साल 1998 में आई अनीस बज्मी निर्देशित फिल्म ‘प्यार तो होना ही था’ में पेरिस में रहने वाली संजना को जब पता चलता हैं की भारत आया हैं उसका मंगेतर किसी दूसरी लड़की के प्यार में पड़ा हैं तब वह उसको अपने साथ वापस लाना तय करती हैं।
इस सफर में उसका साथ शेखर देता हैं। इस मिलते-जुलते आइडिया पर आधारित हैं फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की कहानी। निर्देशक और लेखक शंशाक खेतान इससे पहले अपनी फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया और हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया में कम पढ़ा लिखा नायक और उसके प्यार को पाने के प्रयासों को दिखा चुके हैं।
उसमें एक जोड़ा शादी से नाखुश हो जाता हैं। संवादों में फिल्मों के नाम या कलाकारों की मिमिक्री जैसे मसाले प्रयुक्त करके कॉमेडी को उत्पन्न करने का प्रयास किया गया हैं।
क्या हैं फिल्म की कहानी?- Kya hain film ki kahani?
इस फिल्म की कहानी बाहुबली फिल्म के प्रशंसक सनी संस्कारी की हैं। सराफा व्यवसायी का बेटा सनी अपनी प्रेमिका अनन्या को बाहुबली के अंदाज में शादी के लिए प्रपोज करता हैं, लेकिन वह मना कर देती हैं। वह अपनी माँ के कहने पर अमीर व्यवसायी विक्रम के साथ शादी करने को तैयार होती हैं।

विक्रम स्कूल टीचर तुलसी कुमारी के साथ प्रेम संबंध में होता हैं। मध्यवर्गीय परिवार से आने वाली तुलसी के माता-पिता में अलगाव के कारण विक्रम की माँ और बड़े भाई परम उसको पसंद नहीं करते हैं।
विक्रम और अनन्या की शादी तीन सप्ताह बाद होने वाली होती हैं। वह अपने प्यार की वापस पाने के लिए सनी शादी को तुड़वाने की योजना बनाता हैं। वह अपने साथ तुलसी को लेकर शादी के आयोजन स्थल उदयपुर पहुँचता हैं।
तुलसी को ऐसा लगता हैं की बोरिंग होने के कारण विक्रम ने उसे छोड़ दिया हैं। अभी पांच दिन शादी के बचे हुए हैं। यहाँ पर तुलसी और सनी करीब आएंगे या अपने प्यार को पाएंगे। यह कहानी इसी संबंध में हैं।
जानिए तारा और आकाश की फिल्म की कहानी के बारे में।
रिश्तों में प्यार की गहराई का एहसास नदारद- Rishte mein pyar ki gehrai ka ehsas nadarad
शंशाक खेतान के दृश्य, संवाद और कलाकारों की कामोत्तेजक मुद्राएँ मस्ती और मनोरंजन में विफल रही हैं। लगभग एक जैसे भाव और प्रतिक्रियाओं से ऊब ही होती हैं।

इस फिल्म के पहले हिस्से में सनी और तुलसी जलन पैदा करने, पुराना अहसास जगाने, गलतफहमियाँ जैसे पैतरे आजमाते हैं। इसमें पूरा फोकस सनी और तुलसी पर होता हैं अनन्या और विक्रम के पात्र बहुत दबे होते हैं।
उनके संवाद हो या दोनों पक्ष के बीच की होड़ वह रोमांचक और दिलचस्प नहीं बन पाई हैं। रिश्तों में प्यार की गहराई का अहसान नदारद हैं जबकि दोनों युगल के संबंध पुराने हैं।
आवश्यक जानकारी:- होमबाउंड फिल्म की कहानी के बारे में।
निष्कर्ष- Conclusion
ये हैं सुनी संस्कारी की तुलसी कुमारी फिल्म से संबंधित जानकारियाँ हम आपसे आशा करते हैं की आपको जरुर पसंद आई होगी। इस जानकारी से आपको इस फिल्म के बारे में हर प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी।
इस जानकारी से आपको इस फिल्म की कहानी से संबंधित हर प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त होंगी। अगर आपको हमारी दी हुई जानकारियाँ पसंद आए तो आप हमारी दी हुई जानकारियों को लाइक व कमेंट जरुर कर लें।
इससे हमें प्रोत्साहन मिलेगा ताकि हम आपको बहेतर-से-बहेतर जानकारियाँ प्राप्त करवा सकें। हमारा उद्देश्य आपको घुमराह करना नहीं हैं बल्कि आप तक सही जानकारियाँ प्राप्त करवा सकें। हमारा उद्देश्य आपको घुमराह करना नहीं हैं बल्कि आप तक सही जानकारियाँ प्राप्त करवा सकें।
